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भारत की धार्मिक राजधानी -- वाराणसी

29 Apr 2019

भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी से कई सारी कहानियां जुड़ी हुई हैं। उत्तरप्रदेश राज्य में बसा प्रसिद्ध शहर हिन्दू धर्म का सबसे पवित्र और पूज्यनीय स्थल है, जिसे अविमुक्त क्षेत्र भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म के साथ-साथ यह बौद्ध और जैन धर्म का भी पवित्र स्थल है जिसकी खूबसूरती शाम होते ही गंगा घाट पर नज़र आती है। वाराणसी का नाम दो नदियों वरुणा और असी के संगम पर पड़ा है। [भारत की धार्मिक राजधानी की पवित्र यात्रा!] वाराणसी जिसे बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है, की संस्कृति का गंगा नदी और इसके धार्मिक महत्व से एक अटूट और अहम रिश्ता है। वाराणसी से कई प्राचीन से प्राचीन कहानियां जुड़ी हुई हैं। प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन ने तो वाराणसी के लिए यह भी लिखा है कि, "बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों (लीजेन्ड्स) से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है।" _______ चलिए आज हम आपको वाराणसी से जुड़ी कुछ ऐसी दिलचस्प बातों से रूबरू कराते हैं, जिन्हें जान आपकी वाराणसी की यात्रा करने की इच्छा और बढ़ जाएगी।

वाराणसी से जुड़ी दिलचस्प बातें!

सबसे प्राचीन शहर पवित्र नदी गंगा के तट पर बसा धार्मिक शहर वाराणसी, दुनिया का सबसे पुराना शहर माना जाता है। जिसके अनुसार यह भगवान शिव जी और देवी पार्वती का निवास स्थल हुआ करता था। ऐसा कहा जाता है कि जो भी सबसे आखिर तक यहाँ ज़िंदा रहेगा उसे ज़रूर ही मोक्ष की प्राप्ति होगी। अनगिनत मंदिर वाराणसी एक ऐसा शहर है जहाँ आपको असंख्य संख्याओं में मंदिर देखने को मिलेंगे जो शैव और वैष्णव धर्म को समर्पित हैं। ये दोनों ही धर्म हिन्दू धर्म के ही रूप हैं जो सद्भाव से यहाँ मौजूद हैं। यह जैन धर्म का भी एक प्रमुख केंद्र है क्यूंकि 23 वें तीर्थंकार पार्श्वनाथ का जन्म यहीं हुआ था। रौशनी की पहली किरण यहीं पड़ी ऐसा माना जाता है कि जब पृथ्वी का निर्माण हुआ तब रौशनी की सबसे पहली किरण काशी में ही पड़ी। जैसा की कहा जाता है कि भगवान शिव जी काशी के परमात्मा हैं, इसलिए इस वजह से अन्य ग्रह भी अपनी मर्ज़ी से यहाँ पर कुछ नहीं कर सकते थे जब तक कि शिव जी का आदेश न हो। ऐसा माना जाता है कि शनि देवता जब भगवान शिव जी की खोज में काशी आए तब वे उनके मंदिर में लगभग साढ़े सात सालों तक प्रवेश नहीं कर पाए। आप जब भी कभी काशी के विश्वनाथ मंदिर में जायेंगे, मंदिर के बाहर ही आपको शनि देव जी का मंदिर दिखेगा।

शिक्षा का प्रमुख केंद्र एक महत्वपूर्ण धार्मिक शहर होने के साथ-साथ, वाराणसी शिक्षा और संस्कृति का भी मुख्य केंद्र है। शहर का बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी(बी.एच.यू) एशिया का सबसे बड़ा यूनिवर्सिटी है।_______ आध्यात्मिक केंद्र सारी विविधताओं के साथ वाराणसी आयुर्वेद और योग के प्राचीन समग्र चिकित्सा विज्ञान से भी जुड़ा हुआ है। इन विज्ञान के संस्थापक, महर्षि पतंजलि का वाराणसी से गहरा सम्बन्ध है।