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Location Madanpur,Mirzapur
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औरंगाबाद शहर - एलोरा की गुफाएँ

29 Apr 2019

गुफाएँ एक घने जंगल से घिरी, अश्व नाल आकार घाटी में अजंता गाँव से 3½ कि॰मी॰ दूर बनी है। यह गाँव महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर से 106 कि॰मी॰ दूर बसा है। इसका निकटतम कस्बा है जलगाँव, जो 60 कि॰मी॰ दूर है, भुसावल 70 कि॰मी॰ दूर है। इस घाटी की तलहटी में पहाड़ी धारा वाघूर बहती है। यहाँ कुल 29 गुफाएँ (भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग द्वारा आधिकारिक गणनानुसार) हैं, जो कि नदी द्वारा निर्मित एक प्रपात के दक्षिण में स्थित है। इनकी नदी से ऊँचाई 35 से 110 फीट तक की है।______ अजंता का मठ जैसा समूह है, जिसमें कई विहार (मठ आवासीय) एवं चैत्य गृह हैं (स्तूप स्मारक हॉल), जो कि दो चरणों में बने हैं। प्रथम चरण को गलती से हीनयान चरण कहा गया है, जो कि बौद्ध धर्म के हीनयान मत से सम्बन्धित है। वस्तुतः हिनायन स्थविरवाद के लिए एक शब्द है, जिसमें बुद्ध की मूर्त रूप से कोई निषेध नहीं है। अजंता की गुफा संख्या 9, 10, 12, 13 15ए (अंतिम गुफा को 1956 में ही खोजा गया और अभी तक संख्यित नहीं किया गया है।) को इस चरण में खोजा गया था। इन खुदाइयों में बुद्ध को स्तूप या मठ रूप में दर्शित किया गया है।

हिन्दू, जैन व बौद्ध धर्म से संबन्धित गुफाएँ

एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के उत्तर-पश्चिम में 29 किमी. (18 मील) की दूरी पर स्थित है| इन गुफाओं का निर्माण छठी से बारहवीं सदी के बीच कलचूरी, चालुक्य और राष्ट्रकूट वंशों द्वारा कराया गया था| वर्ष 1983 में युनेस्को ने एलोरा की गुफाओं को ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया | ये गुफाएँ हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म से संबन्धित हैं|______ एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के उत्तर-पश्चिम में 29 किमी. (18 मील) की दूरी पर स्थित है| इन गुफाओं का निर्माण छठी से बारहवीं सदी के बीच कलचूरी, चालुक्य और राष्ट्रकूट वंशों द्वारा कराया गया था| वर्ष 1983 में युनेस्को ने एलोरा की गुफाओं को ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया | ये गुफाएँ हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म से संबन्धित हैं| यहाँ स्थित कुल 34 गुफाओं में से 17 (गुफा संख्या 13 से लेकर 29 तक) हिन्दू, 12 (गुफा संख्या 1 से लेकर 12 तक) बौद्ध और 5 जैन (गुफा संख्या 30 से लेकर 34 तक) धर्म से संबन्धित हैं| यहाँ की सभी जैन गुफाएँ दिगंबर संप्रदाय से संबन्धित हैं|

______एलोरा की गुफाओं से संबन्धित 10 रोचक तथ्य:______ ______स्थानीय स्तर पर एलोरा की गुफाओं को ‘वेरुल लेणी’ के नाम से जाना जाता है| ______यह सम्‍पूर्ण विश्‍व में चट्टान को काट कर बनाए गए सबसे बड़े मठ-मंदिर परिसरों में से एक है। ______एलोरा की गुफाएँ भारत के शैल-कृत्य स्थापत्य (Rock-Cut Architecture) का अद्भुत नमूना हैं| ______एलोरा, विश्‍व में सबसे बड़े एकल एकाश्‍म उत्‍खनन ( Largest Single Monolithic Excavation), विशाल कैलाश (गुफा 16) के लिए विख्‍यात है| ______अजंता की गुफाओं से भिन्‍न, एलोरा की गुफाओं की विशेषता यह है कि व्यापार मार्ग के अत्यंत निकट स्थित होने के कारण इनकी कभी भी उपेक्षा नहीं हुई। ______19वीं सदी के दौरान इन गुफाओं पर इंदौर के होल्करों का नियंत्रण हो गया था, जिन्होनें पूजा के अधिकार के लिए इनकी नीलामी की तथा धार्मिक और प्रवेश शुल्क के लिए इमहें पट्टे पर दे दिया। होल्करों के बाद इनका नियंत्रण हैदराबाद के निजाम को अंतरित कर दिया गया, जिसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मार्गदर्शन में अपने विभाग के माध्यम से गुफाओं की व्यापक मरम्मत एवं रखरखाव करवाया गया। ______एक बड़े पठार की कगार में इन गुफाओं का उत्खनन किया गया है, जो उत्तर-पश्चिम दिशा में लगभग 2 किलोमीटर तक फैला हुआ है। कगार अर्ध-वृत्ताकार रूप में होने से, दक्षिण में दाएं वृत्तांश पर बौद्ध धर्म समूह, जबकि उत्तर में बाएं वृत्तांश पर जैन धर्म समूह एवं केंद्र में हिन्दू धर्म समूह की गुफाएँ हैं। ______यहाँ स्थित सबसे प्रसिद्ध बौद्ध गुफा ‘विश्वकर्मा गुफा’ ('Carpenter's Cave’) (गुफा संख्या 10) है, जोकि एक चैत्यगृह है| दशावतार गुफा (गुफा संख्या 15) में भगवान विष्णु के दस अवतारों को दर्शाया गया है| ______ये गुफाएं महाराष्ट्र की ज्वालामुखीय बसाल्टी संरचनाओं को काट कर बनाई गई हैं, जिन्हें 'दक्कन ट्रेप’कहा जाता है।