:: Welcome To | Indian Culture ::
   
                            Welcome to AWA Culture
               
Call Us 9170800951                
           
Location Madanpur,Mirzapur
single

भारत में खेल

29 Apr 2019

प्राचीन भारत में भी शारीरिक परिश्रम की प्रतिष्ठा थी। हड़प्पा की खुदाई में बच्चों के खेलने के बहुत से मिट्टी के खिलौने मिले हैं। ताँबे की बैलगाड़ी, मिट्टी आदि के अनंत खिलौने, पासों के खेल के पट्टे इत्यादि सिंध सभ्यता के नगरों से प्राप्त हुए हैं। पासों की गोटें बड़े पत्थरों की बनी होती थीं। जुए के खेल, पासे आदि के पट्टे प्राचीन नगरों के खंडहरों से भी मिले हैं, जिससे उस खेल की लोकप्रियता प्रकट है। भारतीय इतिहास में तो इससे अनेक राजवंश नष्ट हो गए थे। नल और पांडव इसी व्यसन से संकटग्रस्त हुए। ऋग्वेद में जुआरी की पत्नी तक को दाँव पर लगाकर हार जाने, उसके तत्पश्चात करु ण विलाप तथा पासों की मोहक शक्ति का बड़ा विशद और मार्मिक वर्णन हुआ है। जुआ लकड़ी के पासों से खेला जाता था। ऋग्वेद में जिस समन नामक मेले का उल्लेख हुआ है, उसमें सामूहिक नृत्यादि रात में और घुड़दौड़, रथधावन आदि खेल दिन में हुआ करते थे। वहीं कुमारियों के लिए वर भी प्राप्त हो जाया करते थे। ऋषि का वाक्य है : नाऽन्य आत्मा बलहीनेन लभ्य:, अर्थात, निर्बल द्वारा आत्मा की उपलब्धि नहीं होती। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष केवल बलवान्‌ को ही मिल सकता है उस समय विनोद और व्यायाम के बहुत से खेल खेले जाते थे। घुड़दौड़ तथा रथों की दौड़ का बहुत प्रचार था।_____ आजकल अंतरराष्ट्रीय खेलों का महत्व दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे खेलों के लिए वर्ल्ड ओलिंपिक्स, विंटर स्पोर्टस, एशियन गेम्स इत्यादि संघटन बहुत लोकप्रिय हैं। इनमें संसार के प्राय: सभी देश भाग लेते हैं। ऐसे खेलों से विभिन्न देशों में परस्पर सदभावना बढ़ाने में यथेष्ट सहायता मिलती है। ये खेल बारी बारी से विभिन्न देशों में आयोजित होते हैं और वहाँ की जनता इन खेलों को देखने के लिए उमड़ पड़ती है। एक ही स्थान पर विभिन्न देशों के खिलाड़ी अपनी विभिन्नताओं के साथ इकट्ठा होते हैं और एक दूसरे से मिलकर वे प्रेरणा ग्रहण करते हैं। प्राय: देखा जाता है कि जो देश जितना सुखी और संपन्न है, उतना ही वह खेलों में भी कुशल है, अर्थात्‌ खेल भी देश की संस्कृति तथा सभ्यता के विकास का आजकल मानदंड होता जा रहा है।

खेल के प्रकार

जलविहार, जिसका वर्णन संस्कृत महाकाव्यों में बहुधा हुआ है, प्राय: हुआ करते थे। कंस के राज्य में कुश्ती का बड़ा प्रचार था। चाणूर शल, और तोषल नामक मुख्य पहलवान कंस के दरबार में थे। कृष्ण को मारने के लिए कंस ने इन्हीं पहलवानों से उनकी कुश्ती कराई थी। महाभारत के समय गुल्ली डंडे का खेल भी प्रचलित था। पांडव और कौरव इस खेल के प्रति विशेष अनुरक्त थे। मदमत्त हाथी को छेड़ना और उससे बचना भी बहुत प्रचलित था। कृष्ण, बलराम, भीमसेन, आदि ने हाथी से होड़ लिया था। इस खेल को साथामारी कहते थे। घुड़वार भी हाथी को छेड़कर अपने को और घोड़े को बचाते थे। इस खेल को दागदारी कहते थे। यह कला आजकल भी विवाह शादी के अवसरों पर कहीं कहीं देखने को मिलती है। द्वारचार के समय घुड़सवार हाथी के मस्तक पर घोड़ा चढ़ाने का प्रयत्न करते हैं।_____ बौद्धकाल में भी खेलों की कमी न थी। उस समय दौड़ना, उछलना, कूदना, फाँदना और घूसेबाजी (मुक्की) का विशेष प्रचार था। खेलकूद तथा मालिश के अलग अलग कमरे बने हुए थे और पास ही एक स्नानागार हुआ करता था। समयांतर से तक्षशिला और नालंदा के विश्वविद्यालय खुले। शिक्षा के इन केंद्रों में बहुत से विभाग थे, जिनमें खेलकूद का विशेष स्थान था। तैराकी, कुश्ती, तीरंदाजी, लँगड़ी इत्यादि क्रियाएँ छात्रों से कराई जाती थीं।_____ विदेशों में क्रिकेट, हाकी, फुटबाल, टेनिस, गोला आदि का प्रचार सदियों पहले हो चुका था। भारत में भी 19 वीं सदी के उत्तरार्ध में लार्ड मेकाले की शिक्षानीति के कारण स्कूलों आदि में खेलों का प्रचार हुआ। कुछ देशी खेलों ने राष्ट्रीय स्तर भी प्राप्त कर लिया है, जैसे कबड्डी और खोखो। खेलकूद का प्रसार भारत में कौंसिल ऑव स्पोर्टस्‌ द्वारा हो रहा है। भारत ने सब विदेशी खेलों, जैसे क्रिकेट, हाकी, फुटबाल, टेनिस तथा दौड़ धूप को खूब अपनाया है और कुछ में तो विश्व भर में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर लिया है। हाकी में 1928ई. से ही भारतीय खिलाड़ी विश्व के आलिंपिक में सर्वोपरि सिद्ध हुए हैं। ध्यान चंद को हाकी का जादूगर कहा गया है। 1960 ई. में पहली बार पाकिस्तान ने रोम की ओलिंपिक हाकी प्रतियोगिता में भारत को हराया। यह खेल भारत के हर भाग में खेला जा रहा है। राजकुमारी कोचिंग स्कीम के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में खेलों का प्रशिक्षण चल रहा है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ भी चलती है, जिनमें बाइटन कप, आगा खाँ कप और अंतरराज्य प्रतियोगिताएँ प्रमुख हैं।

फुटबाल का खेल बंगाल और दक्षिण भारत में विशेष प्रचलित है। अब उत्तरी भारत ने भी इसे अपना लिया है। इस खेल के प्रशिक्षण की सुविधा भी प्राप्त है। 1963 ई. के चौथे एशियन गेम्स की प्रतियोगिता में भारत की टीम विजयी रही है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में आई. एफ. ए. शील्ड, डुरेंड कप प्रमुख हैं। क्रिकेट के खेल में भारत को पहले पहल सन 1932 में टेस्ट स्तर मिला और यह खेल भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया। तब से आज तक भारत और इंग्लैंड के खिलाड़ियों का एक का दूसरे देश में आवागमन बना हुआ है। 1947 ई. में भारत की टीम आस्ट्रेलिया गई थी। उसके बाद वेस्ट इंडीज और कामनवेल्थ की टीमों से टेस्ट स्तर पर मैच खेले जा चुके हैं।_____ बैंडमिंटन में भी भारत का स्थान विश्वविख्यात है। कहा जाता है, बैडमिंटन विदेशी खेल नहीं है। इसकी उत्पत्ति बंबई प्रांत के पूना शहर में हुई। वहाँ से अंग्रेज इसे विलायत ले गए और उसमें संशोधन तथा परिवर्तन कर आधुनिक रूप ग्लोसेस्टर (इंग्लैंड) में दिया। धीर-धीरे इसका प्रचार बढ़ता गया और अन्य देशों ने भी इसे अपना लिया। अब तो यह अंतरराष्ट्रीय खेल हो गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 25 से भी अधिक देश भाग लेते हैं। भारत में इस खेल का स्तर ऊँचा उठता जा रहा है।_____ टेनिस का खेल भी भारत में खूब पनपा। भारत के खिलाड़ी रामनाथन कृष्णन एक बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ चार खिलाड़ियों तक पहुँच गए थे और उस सेमीफाइनल मैच में नील फ्रेजर के हाथ पराजित हुए। यही नील फ्रेजर अंत में विश्वाविजेता रहा।_____ दौड़धूप (टैक और फील्ड स्पोर्टस) में अभी भारत पिछड़ा हुआ है। 100 गज और दो सौ गज की दौड़ में लेवी पिंटों का स्थान है। 1958 के टोकियो के एशियन गेम्स में इन दोनों खेलों में ये विजेता रहे। पोलो, गोल्फ, बौक्सिंग, तैराकी, ऐंगलिंग और हंटिग के खेल भी काफी प्रचलित हैं। शतरंज, बिलियर्ड्‌स, टेबिल टेनिस और ताश के खेल भी भारत में राष्ट्रीय स्तर पर खेले जाते हैं